हमारे परमपिता का सन्दूक इस्राएल को लौट आता है
याजक सलाह देते हैं कि संदूक को सोने की गिल्टियों और चूहों के साथ, ऐसी दो गायों की गाड़ी पर घर भेजा जाए जिनके बछड़े बाड़े में बंद हों। गायें रँभाती हुई सीधे बेतशेमेश चली जाती हैं। कटनी करने वाले आनन्द करते हैं, फिर भीतर झाँकने के कारण सत्तर लोग मर जाते हैं, और नगर पूछता है कि हमारे पिता के सामने कौन ठहर सकता है।
6 1हमारे परमपिता का सन्दूक सात महीने तक पलिश्तियों के देश में रहा। 2तब पलिश्तियों ने याजकों और भावी बतानेवालों को बुलाकर पूछा, “हम यहोवा के सन्दूक के साथ क्या करें? हमें बताओ कि हम उसे उसके स्थान पर कैसे भेजें।”
3उन्होंने कहा, “यदि तुम इस्राएल के परमेश्वर का सन्दूक लौटाओ, तो उसे खाली न भेजना, वरन् किसी भी रीति से उसके लिए दोषबलि लौटाना। तब तुम चंगे हो जाओगे और तुम्हें मालूम हो जाएगा कि उसका हाथ तुम पर से क्यों नहीं हटा।”
4उन्होंने पूछा, “हम उसके लिए कौन-सी दोषबलि लौटाएँ?” उन्होंने उत्तर दिया, “पलिश्तियों के सरदारों की गिनती के अनुसार सोने की पाँच गिलटियाँ और सोने के पाँच चूहे, क्योंकि वही विपत्ति तुम सब पर और तुम्हारे सरदारों पर पड़ी है।
5इसलिए तुम अपनी गिलटियों की और देश को उजाड़नेवाले चूहों की मूरतें बनाना; और इस्राएल के परमेश्वर की महिमा करना। सम्भव है कि वह अपना हाथ तुम पर से, तुम्हारे देवताओं पर से, और तुम्हारे देश पर से हटा ले। 6तुम अपने मन क्यों वैसे कठोर करते हो जैसे मिस्रियों और फ़िरौन ने किए थे? जब उसने उनके साथ कठोरता का बर्ताव किया, तब क्या उन्होंने अन्त में लोगों को जाने न दिया?”
7“अब एक नई गाड़ी बनाओ, और ऐसी दो दुधार गायें लो जो कभी जूए में न जोती गई हों। गायों को गाड़ी में जोत दो, परन्तु उनके बछड़ों को उनसे अलग करके घर में बन्द कर दो। 8फिर यहोवा का सन्दूक लेकर उसे गाड़ी पर रख दो, और जो सोने की वस्तुएँ तुम दोषबलि के रूप में उसे लौटा रहे हो उन्हें एक सन्दूकड़ी में रखकर उसके पास रख दो। तब उसे भेज दो। 9और देखते रहना: यदि वह अपने ही देश के मार्ग से बेतशेमेश को चढ़ जाए, तो जानना कि उसी ने हम पर यह बड़ी विपत्ति डाली है। और यदि नहीं, तो हम जान लेंगे कि उसका हाथ हम पर नहीं पड़ा—यह तो संयोग से हुआ।”
10उन मनुष्यों ने वैसा ही किया: उन्होंने दो दुधार गायें लीं, उन्हें गाड़ी में जोत दिया, और उनके बछड़ों को घर में बन्द कर दिया। 11और उन्होंने हमारे परमपिता का सन्दूक, और वह सन्दूकड़ी जिसमें सोने के चूहे और उनकी गिलटियों की मूरतें थीं, गाड़ी पर रख दीं। 12गायें सीधी बेतशेमेश के मार्ग की ओर चलीं; वे एक ही राजमार्ग पर रँभाती हुई चलती गईं, और न दाहिने न बाएँ मुड़ीं। पलिश्तियों के सरदार उनके पीछे-पीछे बेतशेमेश की सीमा तक गए। 13बेतशेमेश के लोग तराई में गेहूँ काट रहे थे; उन्होंने आँखें उठाकर सन्दूक को देखा और उसे देखकर आनन्दित हुए। 14गाड़ी बेतशेमेश के यहोशू के खेत में पहुँचकर एक बड़े पत्थर के पास खड़ी हो गई। तब उन्होंने गाड़ी की लकड़ी को चीरा और गायों को हमारे परमपिता के लिए होमबलि करके चढ़ाया। 15लेवियों ने हमारे परमपिता का सन्दूक, और उसके पास की वह सन्दूकड़ी जिसमें सोने की वस्तुएँ थीं, उतारकर उस बड़े पत्थर पर रख दिए। और उस दिन बेतशेमेश के लोगों ने हमारे परमपिता के लिए होमबलि और मेलबलि चढ़ाए। 16पलिश्तियों के पाँचों सरदार यह सब देखकर उसी दिन एक्रोन को लौट गए। 17सोने की जो गिलटियाँ पलिश्तियों ने दोषबलि के रूप में हमारे परमपिता को लौटाईं वे ये थीं: अश्दोद, गाज़ा, अश्कलोन, गत और एक्रोन के लिए एक-एक। 18और सोने के चूहे पाँचों सरदारों के अधीन पलिश्तियों के सब नगरों की गिनती के बराबर थे—गढ़वाले नगर हों या खुले गाँव। वह बड़ा पत्थर, जिस पर उन्होंने हमारे परमपिता का सन्दूक रखा था, आज के दिन तक बेतशेमेश के यहोशू के खेत में साक्षी के रूप में खड़ा है। 19परन्तु हमारे परमपिता ने बेतशेमेश के कुछ मनुष्यों को इसलिए मारा कि उन्होंने वाचा के सन्दूक के भीतर झाँका था; उसने उनमें से सत्तर को मार डाला। और लोगों ने विलाप किया, क्योंकि उसने उन पर ऐसी बड़ी मार मारी थी। 20बेतशेमेश के मनुष्यों ने कहा, “इस पवित्र परमेश्वर, हमारे परमपिता के सामने कौन खड़ा हो सकता है? और वह हमारे पास से किसके पास चढ़ जाए?”
21तब उन्होंने किर्यत्यारीम के निवासियों के पास दूत भेजकर कहला भेजा, “पलिश्तियों ने हमारे परमपिता का सन्दूक लौटा दिया है। तुम आकर उसे अपने यहाँ ले जाओ।”