राहेल और लिआ
दो बहनें अपनी दासियों के द्वारा, दूदाफलों और प्रसव के द्वारा होड़ करती हैं, और हर पुत्र का नाम उस झगड़े के अनुसार रखती हैं जो वे लड़ रही हैं और जो हमारे पिता ने सुना। फिर घर लौटना चाहता याकूब धारीदार और चित्तीदार भेड़-बकरियों के मामले में लाबान को चतुराई से मात देता है और बलवान पशुओं के द्वारा धनी हो जाता है।
30 1जब राहेल ने देखा कि वह याकूब के लिये कोई सन्तान नहीं जनती, तब वह अपनी बहन से डाह करने लगी। उसने याकूब से कहा, “मुझे सन्तान दे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी!”
2तब याकूब राहेल पर क्रोधित हुआ। उसने कहा, “क्या मैं हमारे परमपिता के स्थान पर हूँ, जिसने तुझ से गर्भ का फल रोक रखा है?”
3उसने कहा, “यह रही मेरी दासी बिल्हा। तू उसके पास जा, कि वह मेरे लिये सन्तान जने, और उसके द्वारा मैं भी एक परिवार खड़ा कर सकूँ।” a a v3 किसी बालक को ‘घुटनों पर’ जनना एक प्राचीन गोद लेने की रीति थी — जो बालक गोद लेने वाली माता के घुटनों पर रखा जाता, वह विधिपूर्वक उसी का अपना समझा जाता था। 4इसलिये उसने अपनी दासी बिल्हा को उसे पत्नी करके दे दिया, और याकूब उसके पास गया। 5बिल्हा गर्भवती हुई और याकूब के लिये एक पुत्र जनी। 6तब राहेल ने कहा, “हमारे परमपिता ने मेरा न्याय किया है; उसने मेरी सुन भी ली और मुझे एक पुत्र दिया है।” इसलिये उसने उसका नाम दान रखा। b b v6 दान नाम का अर्थ है “उसने न्याय किया।” 7राहेल की दासी बिल्हा फिर गर्भवती हुई और याकूब के लिये दूसरा पुत्र जनी। 8राहेल ने कहा, “मैंने अपनी बहन से घोर मल्लयुद्ध किया, और मैं जीत गई हूँ।” इसलिये उसने उसका नाम नप्ताली रखा। c c v8 नप्ताली नाम का अर्थ है “मेरा संघर्ष।”
9जब लिआ ने देखा कि उसका जनना रुक गया है, तब उसने अपनी दासी जिल्पा को लेकर उसे याकूब को पत्नी करके दे दिया। 10तब लिआ की दासी जिल्पा याकूब के लिये एक पुत्र जनी। 11लिआ ने कहा, “कैसा सौभाग्य!” इसलिये उसने उसका नाम गाद रखा। d d v11 गाद नाम का अर्थ है “सौभाग्य।” 12लिआ की दासी जिल्पा याकूब के लिये दूसरा पुत्र जनी। 13लिआ ने कहा, “मैं कितनी धन्य हूँ! क्योंकि स्त्रियाँ मुझे धन्य कहेंगी।” इसलिये उसने उसका नाम आशेर रखा। e e v13 आशेर नाम का अर्थ है “धन्य” या “आशीषित।”
14गेहूँ की कटनी के दिनों में रूबेन ने बाहर जाकर खेत में दूदाफल पाए, और उन्हें अपनी माता लिआ के पास ले आया। तब राहेल ने लिआ से कहा, “कृपा करके अपने पुत्र के दूदाफलों में से कुछ मुझे दे।” f f v14 दूदाफल एक ऐसा पौधा था जिसके विषय में प्राचीन संसार में यह व्यापक विश्वास था कि वह गर्भधारण में सहायक होता है — इसी कारण राहेल उनके लिये उत्सुक थी।
15परन्तु लिआ ने उत्तर दिया, “क्या मेरे पति को छीन लेना ही तेरे लिये पर्याप्त न था? अब क्या तू मेरे पुत्र के दूदाफल भी ले लेगी?” राहेल ने कहा, “अच्छा—तेरे पुत्र के दूदाफलों के बदले वह आज रात तेरे साथ सो सकता है।”
16जब याकूब सांझ को खेत से आया, तब लिआ उससे मिलने निकली और बोली, “तुझे मेरे ही साथ सोना होगा, क्योंकि मैंने अपने पुत्र के दूदाफलों से तुझे सचमुच मोल लिया है।” इसलिये वह उस रात उसके साथ रहा।
17और हमारे परमपिता ने लिआ की सुन ली, और वह गर्भवती हुई और याकूब के लिये पाँचवाँ पुत्र जनी। 18लिआ ने कहा, “हमारे परमपिता ने मुझे मेरी मजदूरी दी है, क्योंकि मैंने अपनी दासी अपने पति को दी।” इसलिये उसने उसका नाम इस्साकार रखा। g g v18 इस्साकार नाम का अर्थ है “मजदूरी” या “प्रतिफल।” 19लिआ फिर गर्भवती हुई और याकूब के लिये छठवाँ पुत्र जनी। 20तब लिआ ने कहा, “हमारे परमपिता ने मुझे एक उत्तम दान दिया है। अब मेरा पति मेरा आदर करेगा, क्योंकि मैंने उसके लिये छ: पुत्र जने हैं।” इसलिये उसने उसका नाम जबूलून रखा। h h v20 जबूलून नाम का अर्थ है “आदर।” 21इसके बाद उसने एक पुत्री जनी और उसका नाम दीना रखा।
22तब हमारे परमपिता ने राहेल को स्मरण किया; उसने उसकी सुन ली और उसकी कोख खोल दी। 23वह गर्भवती हुई और एक पुत्र जनी, और कहा, “हमारे परमपिता ने मेरी नामधराई दूर कर दी है।” 24उसने उसका नाम यूसुफ रखा, यह कहकर, “हमारे परमपिता मुझे एक और पुत्र दें।” i i v24 यूसुफ नाम का अर्थ है “वह और बढ़ाए।”
मुझे मेरे घर भेज दे
25ज्योंही राहेल यूसुफ को जन चुकी, याकूब ने लाबान से कहा, “मुझे विदा कर, कि मैं अपने घर और अपने देश को लौट जाऊँ। 26मेरी पत्नियाँ और मेरे बच्चे, जिनके लिये मैंने तेरी सेवा की है, मुझे दे, और मुझे जाने दे। तू जानता है कि मैंने तेरी कैसी सेवा की है।”
27परन्तु लाबान ने उससे कहा, “यदि तेरी दृष्टि में मुझ पर अनुग्रह हुआ हो तो ठहर जा—मैंने भावी कहने के द्वारा जान लिया है कि परमेश्वर ने तेरे कारण मुझे आशीष दी है।” 28उसने कहा, “तू अपनी मजदूरी ठहरा ले, और मैं उसे दूँगा।”
29याकूब ने उससे कहा, “तू आप जानता है कि मैंने तेरी कैसी सेवा की है, और मेरी देखरेख में तेरे पशु कैसे बढ़े हैं। 30क्योंकि मेरे आने से पहले तेरे पास थोड़ा ही था, और वह बहुत बढ़ गया है; जहाँ कहीं मैं गया, वहाँ हमारे परमपिता ने तुझे आशीष दी है। परन्तु अब मैं अपने घराने के लिये भी कब उपार्जन करूँगा?”
31उसने पूछा, “मैं तुझे क्या दूँ?” याकूब ने उत्तर दिया, “तू मुझे कुछ मत दे। यदि तू मेरे लिये यह एक बात करे, तो मैं फिर तेरी भेड़-बकरियों को चराने और रखवाली करने लगूँगा।
32आज मैं तेरे सब पशुओं में से होकर निकलूँ, और उनमें से हर एक चित्तीवाली और धब्बेवाली भेड़, और हर एक काला मेम्ना, और बकरियों में से धब्बेवाली और चित्तीवाली अलग कर दूँ, और वही मेरी मजदूरी ठहरे। 33इस प्रकार आगे चलकर जब तू मेरी मजदूरी की जाँच करने आएगा, तब मेरी ईमानदारी मेरे पक्ष में साक्षी देगी। बकरियों में से जो चित्तीवाली और धब्बेवाली न हो, और मेम्नों में से जो काला न हो, यदि वह मेरे पास पाया जाए, तो चुराया हुआ ठहरे।”
34लाबान ने कहा, “अच्छा! जैसा तूने कहा है, वैसा ही हो।”
35उसी दिन लाबान ने धारीवाले और धब्बेवाले बकरों को, और सब चित्तीवाली और धब्बेवाली बकरियों को—जिन में कुछ श्वेत था—और हर एक काले मेम्ने को अलग करके अपने पुत्रों के हाथ में सौंप दिया। 36और उसने अपने और याकूब के बीच तीन दिन की दूरी ठहरा दी, और याकूब लाबान की शेष भेड़-बकरियों को चराने लगा।
37तब याकूब ने चिनार, बादाम और अरमोन वृक्षों की हरी टहनियाँ लीं, और उनमें श्वेत धारियाँ छीलकर उनकी लकड़ी का श्वेत भाग खोल दिया। 38और जो टहनियाँ उसने छीली थीं, उन्हें उसने पानी की कुण्डियों में, अर्थात् उन नान्दों में, झुण्डों के सामने रख दिया जहाँ वे पानी पीने आते थे। और जब वे पानी पीने आते तब गाभिन हो जाते थे, 39इसलिये झुण्ड उन टहनियों के सामने गाभिन होते, और धारीवाले, चित्तीवाले और धब्बेवाले बच्चे जनते थे। 40याकूब ने मेम्नों को अलग किया, और झुण्डों का मुख लाबान के झुण्ड के धारीवाले और सब काले पशुओं की ओर कर दिया। उसने अपने झुण्डों को अलग रखा और उन्हें लाबान के झुण्ड के साथ न मिलाया। 41जब-जब बलवन्त पशु गाभिन होते, तब याकूब उन टहनियों को कुण्डियों में झुण्ड की आँखों के सामने रख देता, कि वे उन टहनियों के बीच गाभिन हों, 42परन्तु दुर्बल पशुओं के लिये वह उन्हें वहाँ न रखता। इसलिये दुर्बल पशु लाबान के, और बलवन्त पशु याकूब के हो जाते। 43इस प्रकार वह मनुष्य अत्यन्त धनवान हो गया, और उसके पास बड़े-बड़े झुण्ड, दासियाँ और दास, और ऊँट और गदहे हो गए।