दीना
एक स्थानीय राजकुमार दीना को पकड़कर उसके साथ बलात्कार करता है, और फिर उससे विवाह करना चाहता है। उसके भाई झूठी शान्ति से उत्तर देते हैं — खतने की माँग करते हैं, फिर जब पुरुष पीड़ा में होते हैं तब नगर के हर पुरुष को मार डालते हैं। याकूब की एकमात्र शिकायत अपने ऊपर आए खतरे की है।
34 1दीना, जो लिआ: ने याकूब के लिए जनी थी, उस देश की स्त्रियों से भेंट करने को निकली। 2जब हिव्वी हमोर के पुत्र शेकेम ने, जो उस देश का प्रधान था, उसे देखा, तो उसे पकड़कर उसके साथ कुकर्म किया और उसे भ्रष्ट किया। 3उसका मन याकूब की पुत्री दीना में लग गया—वह उस लड़की से प्रेम करने लगा और उसके मन को भानेवाली बातें कहने लगा। 4तब शेकेम ने अपने पिता हमोर से कहा, “इस लड़की को मेरी पत्नी होने के लिये ले दे।”
5याकूब ने सुना कि शेकेम ने उसकी पुत्री दीना को अशुद्ध कर दिया है, परन्तु उसके पुत्र उसके पशुओं के संग मैदान में थे, इसलिये याकूब उनके आने तक चुप रहा। 6तब शेकेम का पिता हमोर याकूब से बातचीत करने को उसके पास निकल आया। 7जब याकूब के पुत्र यह सुनकर मैदान से आए, तब वे पुरुष अत्यन्त दुःखी और क्रोधित हुए, क्योंकि शेकेम ने याकूब की पुत्री के साथ सोकर इस्राएल में एक निन्दनीय काम किया था, ऐसा काम जो करना उचित न था। 8हमोर ने उनसे बातचीत की, “मेरे पुत्र शेकेम का मन तुम्हारी पुत्री पर लगा है। कृपया उसे उसकी पत्नी होने के लिये दे दो। 9और हमारे साथ ब्याह-शादी करो—अपनी पुत्रियाँ हमें दो, और हमारी पुत्रियाँ अपने लिये ले लो। 10हमारे संग बसो; यह देश तुम्हारे सामने खुला है—इसमें बसो, व्यापार करो और सम्पत्ति कमाओ।”
11शेकेम ने दीना के पिता और भाइयों से कहा, “तुम्हारी दृष्टि में मुझ पर अनुग्रह हो; जो कुछ तुम मुझसे कहोगे, मैं दूँगा। 12तुम मुझसे चाहे कितना ही अधिक जोड़-दहेज और भेंट क्यों न माँगो—मैं दूँगा। बस उस लड़की को मेरी पत्नी होने के लिये दे दो।”
13याकूब के पुत्रों ने शेकेम और उसके पिता हमोर को छल से उत्तर दिया, क्योंकि शेकेम ने उनकी बहन दीना को अशुद्ध किया था। 14उन्होंने उनसे कहा, “हम ऐसा नहीं कर सकते—अपनी बहन को किसी खतनारहित पुरुष को दें; यह तो हमारे लिये लज्जा की बात होगी। 15हम केवल इसी शर्त पर मानेंगे: यदि तुम हमारे समान हो जाओ, अर्थात् तुम में का हर एक पुरुष खतना कराए। 16तब हम अपनी पुत्रियाँ तुम्हें देंगे और तुम्हारी पुत्रियाँ अपने लिये ले लेंगे; हम तुम्हारे संग बसेंगे और एक ही जाति बन जाएँगे। 17परन्तु यदि तुम हमारी न सुनोगे और खतना न कराओगे, तो हम अपनी पुत्री को लेकर चले जाएँगे।”
18उनकी बातें हमोर और उसके पुत्र शेकेम को अच्छी लगीं। 19उस जवान ने यह काम करने में देर न की, क्योंकि वह याकूब की पुत्री पर मोहित था—और वह अपने पिता के घराने में सबसे अधिक प्रतिष्ठित था। 20तब हमोर और उसका पुत्र शेकेम अपने नगर के फाटक पर आए और अपने नगर के पुरुषों से कहा, 21“ये मनुष्य हमारे साथ मेल से रहनेवाले हैं। इन्हें इस देश में बसने और इसमें व्यापार करने दो—यह देश तो इनके लिये चौड़ा और खुला है। हम इनकी पुत्रियाँ ब्याह के लिये लेंगे और अपनी पुत्रियाँ इन्हें देंगे। 22परन्तु केवल इसी शर्त पर ये मनुष्य हमारे संग एक ही जाति होकर बसने को मानेंगे: कि हम में का हर एक पुरुष खतना कराए, जैसे वे खतनावाले हैं। 23क्या इनके पशु, इनकी सम्पत्ति और इनके सब जानवर हमारे न हो जाएँगे? बस हम इनकी बात मान लें, तो ये हमारे संग बस जाएँगे।”
24जितने लोग उसके नगर के फाटक से निकलते थे, उन सभी ने हमोर और उसके पुत्र शेकेम की बात मानी, और हर एक पुरुष का, अर्थात् जितने उसके नगर के फाटक से निकलते थे, उन सभी का खतना किया गया। 25तीसरे दिन, जब वे पीड़ा में ही थे, तब याकूब के दो पुत्रों शिमोन और लेवी ने, जो दीना के भाई थे, अपनी-अपनी तलवार ली और निडर नगर पर धावा बोलकर हर एक पुरुष को घात किया। 26उन्होंने हमोर और उसके पुत्र शेकेम को तलवार से घात किया, और दीना को शेकेम के घर से निकालकर ले गए। 27याकूब के पुत्र मारे हुओं पर आ पड़े और उन्होंने नगर को लूट लिया, क्योंकि वहाँ के पुरुषों ने उनकी बहन को अशुद्ध किया था। 28उन्होंने इनकी भेड़-बकरियाँ, इनके गाय-बैल, इनके गदहे और जो कुछ नगर में और मैदान में था, सब कुछ ले लिया। 29और उनका सारा धन, उनके सब बाल-बच्चे और उनकी स्त्रियों को बन्दी बनाकर ले गए, और घरों में जो कुछ था, सब लूट लिया। 30तब याकूब ने शिमोन और लेवी से कहा, “तुम ने इस देश के निवासियों, अर्थात् कनानियों और परिज्जियों के बीच मुझे घृणित ठहराकर मुझ पर विपत्ति ला दी है। मेरे साथ के लोग तो थोड़े हैं; यदि वे मेरे विरुद्ध इकट्ठे होकर मुझ पर धावा करें, तो मैं अपने घराने समेत नष्ट हो जाऊँगा।”
31परन्तु उन्होंने कहा, “क्या वह हमारी बहन के साथ वेश्या का सा व्यवहार करे?”