पिलानेवाला और रोटी बनानेवाला
फ़िरौन के दो अधिकारी एक ही बन्दीगृह की कोठरी में स्वप्न देखते हैं। यूसुफ, यह कहते हुए कि अर्थ बताना हमारे पिता का काम है, दोनों का अर्थ ईमानदारी से बताता है: पिलानेहारा जीवित रहेगा, पकानेहारा फाँसी पर लटकाया जाएगा। वह केवल इतना माँगता है कि उसे याद रखा जाए। उसे याद नहीं रखा जाता — अध्याय इस बात पर समाप्त होता है कि पिलानेहारा उसे पूरी तरह भूल जाता है।
40 1इन बातों के बाद, मिस्र के राजा के पिलानेवाले और रोटी बनानेवाले ने अपने स्वामी, मिस्र के राजा के विरुद्ध पाप किया। 2फ़िरौन अपने इन दोनों हाकिमों, प्रधान पिलानेवाले और प्रधान रोटी बनानेवाले पर अत्यन्त क्रोधित हुआ। 3उसने उन्हें अंगरक्षकों के प्रधान के घर, अर्थात् उसी बन्दीगृह में डलवा दिया जहाँ यूसुफ़ बन्दी था। 4अंगरक्षकों के प्रधान ने यूसुफ़ को उनकी सेवा में नियुक्त किया; और वे कुछ दिनों तक हवालात में रहे। 5तब उन दोनों ने, अर्थात् मिस्र के राजा के पिलानेवाले और रोटी बनानेवाले ने, जो बन्दीगृह में क़ैद थे, एक ही रात में अपना-अपना स्वप्न देखा, और हर एक स्वप्न का अपना-अपना अर्थ था। 6जब यूसुफ़ भोर को उनके पास आया, तो उसने देखा कि वे उदास हैं। 7उसने फ़िरौन के उन हाकिमों से, जो उसके साथ उसके स्वामी के घर में हवालात में थे, पूछा, “आज तुम्हारे चेहरे उदास क्यों हैं?”
8उन्होंने उससे कहा, “हम दोनों ने स्वप्न देखे हैं, और उनका अर्थ बतानेवाला कोई नहीं।” यूसुफ़ ने उत्तर दिया, “क्या अर्थ बताना हमारे परमपिता के हाथ में नहीं? कृपया वे स्वप्न मुझे बताओ।” a a v8 यूसुफ़ हर सच्चे अर्थ के स्रोत के रूप में हमारे परमपिता का नाम लेता है — उन मिस्रियों के सामने भी जो उन्हें नहीं जानते।
9तब प्रधान पिलानेवाले ने यूसुफ़ को अपना स्वप्न बताया: “मेरे स्वप्न में मेरे सामने एक दाखलता थी। 10उस दाखलता में तीन डालियाँ थीं; ज्यों ही उसमें कलियाँ फूटीं, उसके फूल खिल उठे, और उसके गुच्छे पककर अंगूर बन गए। 11फ़िरौन का कटोरा मेरे हाथ में था; मैंने वे अंगूर लेकर फ़िरौन के कटोरे में निचोड़े, और वह कटोरा फ़िरौन के हाथ में दे दिया।”
12तब यूसुफ़ ने उससे कहा, “इसका अर्थ यह है: वे तीन डालियाँ तीन दिन हैं। 13तीन दिन के भीतर फ़िरौन तेरा सिर ऊँचा करेगा, और तुझे तेरे पद पर फिर से बहाल करेगा, और तू पहले की भाँति, जब तू उसका पिलानेवाला था, फ़िरौन का कटोरा उसके हाथ में देगा। 14पर जब तेरा भला हो, तब मुझे स्मरण रखना; कृपया मुझ पर यह दया करना—फ़िरौन के सामने मेरी चर्चा करना, ताकि वह मुझे इस घर से निकाले। 15क्योंकि मैं तो सचमुच इब्रियों के देश से चुराकर लाया गया हूँ, और यहाँ भी मैंने ऐसा कुछ नहीं किया कि इस काल कोठरी में डाला जाऊँ।”
16जब प्रधान रोटी बनानेवाले ने देखा कि उसने अच्छा अर्थ बताया, तो उसने यूसुफ़ से कहा, “मैंने भी एक स्वप्न देखा: मेरे सिर पर सफ़ेद रोटी की तीन टोकरियाँ थीं। 17सबसे ऊपरवाली टोकरी में फ़िरौन के लिए हर प्रकार के पके हुए पकवान थे, पर पक्षी उन्हें मेरे सिर की टोकरी में से खा रहे थे।”
18यूसुफ़ ने उत्तर दिया, “इसका अर्थ यह है: वे तीन टोकरियाँ तीन दिन हैं। 19तीन दिन के भीतर फ़िरौन तेरा सिर तुझ पर से उतार लेगा, और तुझे एक वृक्ष पर टाँग देगा—और पक्षी तेरा माँस नोच-नोचकर खाएँगे।” 20तीसरे दिन, जो फ़िरौन का जन्मदिन था, उसने अपने सब हाकिमों के लिए भोज दिया, और उनके बीच अपने प्रधान पिलानेवाले का सिर और अपने प्रधान रोटी बनानेवाले का सिर ऊँचा किया, 21अर्थात् उसने प्रधान पिलानेवाले को उसके पद पर फिर बहाल किया, और उसने कटोरा फ़िरौन के हाथ में दिया। 22पर उसने प्रधान रोटी बनानेवाले को टाँग दिया, ठीक जैसा यूसुफ़ ने उन्हें अर्थ बताया था। 23फिर भी प्रधान पिलानेवाले ने यूसुफ़ को स्मरण न रखा—वह उसे भूल गया।