एप्रैम घर नहीं लौटेगा
एप्रैम अधपकी रोटी है, मिस्र और अश्शूर के बीच फड़फड़ाती एक भोली कबूतरी, एक भट्ठी जिसकी आग रात भर सुलगती है। राजा एक के बाद एक गिरते हैं और कोई हमारे पिता को नहीं पुकारता। वे कहते हैं कि वे उन्हें छुड़ा लेते, पर वे लौटने के बजाय अपने बिछौनों पर विलाप करते हैं।
7 1जब भी मैं इस्राएल को चंगा करना चाहता हूँ, तब एप्रैम का अधर्म और शोमरोन की बुराइयाँ प्रकट हो जाती हैं; क्योंकि वे छल करते हैं—चोर भीतर सेंध लगाता है, और लुटेरे बाहर लूटमार करते हैं। 2परन्तु वे अपने मन में यह नहीं सोचते कि मैं उनकी सारी बुराई को स्मरण रखता हूँ। अब उनके काम उन्हें घेरे हुए हैं; वे मेरे सामने हैं।
3वे अपनी बुराई से राजा को, और अपने झूठ से हाकिमों को आनन्दित करते हैं। 4वे सब के सब व्यभिचारी हैं, उस तंदूर के समान जिसे पकानेवाला गरम करता है, और आटा गूँधने से लेकर उसके ख़मीर उठने तक आग को कुरेदना बन्द कर देता है। 5हमारे राजा के उत्सव के दिन हाकिम दाखमधु की तपन से अपने आप को रोगी कर लेते हैं; उसने ठट्ठा करनेवालों से हाथ मिलाया। 6क्योंकि जब वे घात लगाए रहते हैं, तब अपने मनों को तंदूर के समान धधकाते हुए निकट आते हैं; रात भर उनका क्रोध सुलगता रहता है, और भोर को वह लपटदार आग के समान भड़क उठता है। 7वे सब के सब तंदूर के समान तपते हैं, और अपने न्यायियों को भस्म कर डालते हैं। उनके सब राजा गिर पड़े हैं; उनमें से कोई मुझे नहीं पुकारता।
8एप्रैम अन्य जातियों में मिल-जुल गया है; एप्रैम ऐसी रोटी के समान है जो उलटी न गई हो। 9परदेशी उसका बल खा जाते हैं, और वह इसे नहीं जानता; उसके सिर पर धौले बाल छा गए हैं, और वह इसे नहीं जानता। 10इस्राएल का घमण्ड उसके मुँह पर उसके विरुद्ध साक्षी देता है, तौभी वे इन सब बातों के बावजूद अपने परमपिता के पास नहीं लौटते, और न उसे ढूँढ़ते हैं।
11एप्रैम एक कबूतरी के समान हो गया है, जो निर्बुद्धि और समझहीन है, जो मिस्र को पुकारता और अश्शूर को जाता है। 12जब वे जाएँगे, तब मैं उन पर अपना जाल फैलाऊँगा; मैं उन्हें आकाश के पक्षियों के समान नीचे गिराऊँगा। जैसा उनकी मण्डली को चिताया गया था, वैसा ही मैं उन्हें ताड़ना दूँगा।
13उन पर हाय, क्योंकि वे मुझसे भटक गए हैं! उन पर विनाश, क्योंकि उन्होंने मुझसे बलवा किया है! मैं तो उन्हें छुड़ाना चाहता, परन्तु वे मेरे विरुद्ध झूठ बोलते हैं। 14वे अपने मन से मुझे नहीं पुकारते, परन्तु अपने बिछौनों पर पड़े हुए विलाप करते हैं; अन्न और नई दाखमधु के लिये वे अपने आप को घायल करते हैं; वे मुझसे दूर हो जाते हैं। a a v14 देह को काटना कनान के मूर्तिपूजक उर्वरता-संस्कारों का एक अंग था, जो अन्न और दाखमधु के लिये तूफ़ान-देवताओं से गिड़गिड़ाने के लिये किया जाता था—यह मन से परमपिता को पुकारने के ठीक विपरीत है। 15यद्यपि मैंने उनकी भुजाओं को सिखाया और बलवन्त किया, तौभी वे मेरे विरुद्ध बुराई की युक्ति करते हैं। 16वे फिरते तो हैं, परन्तु ऊपर की ओर नहीं; वे ढीले धनुष के समान हो गए हैं। उनके हाकिम अपनी जीभ के ढिठाई भरे बोल के कारण तलवार से गिरेंगे; इसी से वे मिस्र देश में उपहास का विषय बनेंगे।