दुष्ट और उनके मार्ग
प्रधान बजानेवाले के लिये। हमारे परमपिता के दास दाऊद का एक भजन।
यह एक दुष्ट मनुष्य के मन के भीतर से शुरू होता है, जहाँ वह अपनी ही इतनी चापलूसी करता है कि अपना पाप देख ही नहीं पाता। उस तंग आत्म-संवाद के सामने भजन खुलकर हमारे पिता की ओर बढ़ता है: बादलों तक पहुँचता प्रेम, पहाड़ों जैसी धार्मिकता, आनंद की नदी, वह ज्योति जिससे हम ज्योति देखते हैं।
36 1दुष्ट के मन के भीतर गहराई में अपराध उससे बोलता है; उसकी आँखों के सामने हमारे परमपिता का कोई भय नहीं है।
2क्योंकि वह अपनी ही दृष्टि में अपनी इतनी चापलूसी करता है कि वह न तो अपने पाप को पहचान पाता है, न उससे घृणा कर पाता है। 3उसके मुँह के वचन दुष्टता और छल से भरे हैं; उसने बुद्धिमानी से चलना और भलाई करना छोड़ दिया है। 4अपने बिछौने पर भी वह दुष्टता की युक्ति रचता है; वह अपने आप को ऐसे मार्ग पर लगाता है जो अच्छा नहीं है; वह बुराई को अस्वीकार नहीं करता।
5हे हमारे परमपिता, तेरी वाचा का प्रेम आकाश तक पहुँचता है, तेरी सच्चाई बादलों तक। 6तेरी धार्मिकता ऊँचे पहाड़ों के समान है, तेरे न्याय गहरे समुद्र के समान; हे हमारे परमपिता, तू मनुष्य और पशु दोनों को बचाता है। 7हे हमारे परमपिता, तेरी वाचा का प्रेम कितना अनमोल है! सब मनुष्य तेरे पंखों की छाया में शरण लेते हैं। 8वे तेरे भवन की भरपूरी से तृप्त होते हैं, और तू उन्हें अपने सुखों की नदी से पिलाता है। 9क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है; तेरे प्रकाश में हम प्रकाश देखते हैं।
10जो तुझे जानते हैं उन पर अपनी वाचा का प्रेम, और जो मन के सीधे हैं उन पर अपनी धार्मिकता बनाए रख। 11घमण्डी का पाँव मुझे न रौंदने पाए, और न दुष्ट का हाथ मुझे मार भगाने पाए। 12वहाँ कुकर्मी गिर पड़े हैं; वे ऐसे पटक दिए गए हैं कि फिर उठ नहीं सकते।