तेरा नाम कैसा प्रतापी है
प्रधान बजानेवाले के लिए : गित्तीत राग में। दाऊद का एक भजन।
रात के आकाश को निहारते हुए भजनकार पूछता है कि चाँद और तारों का रचनेवाला ऐसे छोटे प्राणियों पर ध्यान ही क्यों देगा। उत्तर यह नहीं कि मनुष्य बड़े हैं, बल्कि यह कि हमारे पिता ने उन्हें महिमा का मुकुट पहनाया और अपने हाथों के काम उनके हवाले कर दिए।
8 1हे हमारे सर्वसत्ताधारी परमपिता, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर कैसा प्रतापी है! तूने अपनी महिमा को आकाश के ऊपर स्थापित किया है। 2बच्चों और दूध पीते शिशुओं के मुख से तूने सामर्थ्य स्थिर की है, अपने विरोधियों के कारण, ताकि शत्रु और पलटा लेनेवाले को चुप करा दे। 3जब मैं तेरे आकाश को देखता हूँ, जो तेरी उंगलियों की कारीगरी है, चाँद और तारों को जिन्हें तूने स्थिर किया है, 4तो मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और मनुष्य का पुत्र क्या है कि तू उसकी सुधि ले? a a v4 इब्रानियों का लेखक इन शब्दों को यीशु पर लागू करता है — वह मनुष्य का पुत्र जो थोड़े समय के लिए स्वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया, फिर महिमा और आदर का मुकुट पहनाया गया (इब्रानियों 2:6-9)। 5तौभी तूने उसे स्वर्गीय प्राणियों से थोड़ा ही कम बनाया, और महिमा और आदर का मुकुट उसके सिर पर रखा। 6तूने उसे अपने हाथों के कामों पर प्रभुता दी; तूने सब कुछ उसके पाँवों के नीचे कर दिया : 7सब भेड़-बकरियाँ और बैल, और मैदान के जंगली पशु भी, 8आकाश के पक्षी, और समुद्र की मछलियाँ, जो कुछ समुद्र के मार्गों में चलता-फिरता है। 9हे हमारे सर्वसत्ताधारी परमपिता, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर कैसा प्रतापी है!