मूर्ख का इन्कार
प्रधान बजानेवाले के लिये। दाऊद का भजन।
मूर्ख का यह दावा कि कोई परमेश्वर नहीं, सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक माना गया है। हमारे पिता सारी मानवजाति में खोजते हैं कि कोई समझदार है या नहीं, और एक भी नहीं पाते। जो उनके लोगों को निगल जाते हैं उन पर अचानक भय छा जाता है; भजन सिय्योन से उद्धार की लालसा के साथ समाप्त होता है।
14 1मूर्ख अपने मन में कहता है, “कोई परमेश्वर नहीं है।” वे भ्रष्ट हैं, उनके काम घिनौने हैं; कोई भी भला करनेवाला नहीं।
2हमारे परमपिता स्वर्ग से मनुष्य की सन्तान पर दृष्टि करते हैं, कि देखें कि कोई समझदार है, कोई उन्हें ढूँढ़नेवाला है या नहीं। 3वे सब भटक गए हैं; वे सब मिलकर भ्रष्ट हो गए हैं; कोई भला करनेवाला नहीं, एक भी नहीं।
4क्या ये सब अनर्थकारी कुछ भी नहीं जानते, जो मेरी प्रजा को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी खाते हैं, और हमारे परमपिता को कभी नहीं पुकारते? 5वहाँ वे भय से थरथरा उठे, क्योंकि हमारे परमपिता धर्मियों की पीढ़ी के संग हैं। 6हे अनर्थकारियो, तुम दीन की युक्तियों को विफल करना चाहते हो, परन्तु हमारे परमपिता उसका शरणस्थान हैं।
7काश, इस्राएल का उद्धार सिय्योन से निकल आता! जब हमारे परमपिता अपनी प्रजा को बन्धुआई से लौटा लाएँगे, तब याकूब मगन हो, इस्राएल आनन्दित हो।