तू कब तक छिपाए रहेगा?
प्रधान बजानेवाले के लिए। दाऊद का एक भजन।
दाऊद चार बार पूछता है कि कब तक — कब तक भुलाया रहूँ, कब तक तुम मुझसे मुख छिपाओगे, कब तक दुःख उठाऊँ, कब तक शत्रु मुझ पर प्रबल रहे। उसकी स्थिति में कुछ नहीं बदलता। फिर भी भजन अपने पिता के प्रेम पर आकर मुड़ जाता है, और पहले से पाई भलाई के गीत के साथ समाप्त होता है।
13 1हे मेरे परमपिता, तू कब तक मुझे भूला रहेगा? क्या सदा के लिए? तू कब तक अपना मुख मुझ से छिपाए रहेगा?
2मैं कब तक अपने विचारों से जूझता रहूँ और दिन भर अपने मन में शोक लिए फिरूँ? मेरा शत्रु कब तक मुझ पर प्रबल रहेगा? 3हे मेरे परमपिता, मुझ पर दृष्टि कर और मुझे उत्तर दे; मेरी आँखों में ज्योति दे, कहीं ऐसा न हो कि मैं मृत्यु की नींद सो जाऊँ।
4मेरा शत्रु कहेगा, “मैंने उस पर जय पा ली है,” और मेरे विरोधी आनन्दित होंगे जब मैं गिर जाऊँ। 5परन्तु मैंने तो तेरी करुणा पर भरोसा रखा है; तेरे उद्धार से मेरा मन आनन्दित होगा। 6मैं अपने परमपिता के लिए गाऊँगा, क्योंकि उसने मुझ पर बड़ी भलाई की है।