सृष्टि की वाणी
प्रधान बजानेवाले के लिये। दाऊद का भजन।
दो गवाह, एक साथ जुड़े हुए। सूर्य और आकाश बिना शब्दों के पृथ्वी की छोर तक बोलते हैं; फिर हमारे पिता की शिक्षा साफ़-साफ़ बोलती है, छत्ते से टपकते मधु से भी मीठी। दोनों को सुनकर भजनकार उन दोषों से शुद्ध किए जाने की विनती करता है जिन्हें वह देख नहीं सकता।
19 1आकाश हमारे परमपिता की महिमा का वर्णन करता है; और अन्तरिक्ष उसके हाथों के कार्य को प्रगट करता है। 2दिन प्रतिदिन वे अपनी बातें उण्डेलते हैं; और रात प्रतिरात ज्ञान प्रगट करते हैं। 3न कोई बोली है, न कोई शब्द—उनकी वाणी सुनी नहीं जाती। 4फिर भी उनकी वाणी सारी पृथ्वी पर फैल जाती है, और उनके वचन जगत के छोर तक पहुँचते हैं। उसने आकाश में सूर्य के लिये एक तम्बू खड़ा किया है, 5जो दुल्हे के समान है जो अपनी कोठरी से निकलता है, और वीर के समान जो अपनी दौड़ में हर्ष के साथ दौड़ता है। 6वह आकाश के एक छोर से उदय होता है, और उसका चक्र दूसरे छोर तक पहुँचता है; और उसकी तपन से कुछ भी छिपा नहीं रहता।
7हमारे परमपिता की व्यवस्था खरी है, और प्राण को ताजा करती है; हमारे परमपिता की चितौनी सच्ची है, और भोले को बुद्धिमान बनाती है। 8हमारे परमपिता के उपदेश सीधे हैं, और मन को आनन्दित करते हैं; हमारे परमपिता की आज्ञा निर्मल है, और आँखों को ज्योति देती है। 9हमारे परमपिता का भय पवित्र है, और सदा बना रहता है; हमारे परमपिता के नियम सत्य हैं, और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 10वे सोने से, वरन बहुत कुन्दन से भी अधिक चाहने योग्य हैं; और मधु से, वरन छत्ते से टपकनेवाले मधु से भी अधिक मीठे हैं। 11इनके द्वारा तेरा दास चिताया जाता है; और इनके पालन करने से बड़ा प्रतिफल मिलता है।
12अपनी भूलों को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त दोषों से मुझे शुद्ध कर। 13अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वे मुझ पर प्रभुता न करने पाएँ। तब मैं निर्दोष ठहरूँगा, और बड़े अपराध से निर्दोष रहूँगा।
14मेरे मुँह के वचन और मेरे हृदय का मनन तेरी दृष्टि में ग्रहणयोग्य हों, हे मेरे परमपिता, मेरी चट्टान और मेरे छुड़ानेवाले।