कोई भला करनेवाला नहीं
प्रधान बजानेवाले के लिए महलत राग में; दाऊद का एक भक्ति-गीत।
लगभग भजन 14 जैसा ही। हमारे पिता सारी मानवजाति पर दृष्टि डालते हैं, किसी एक को ढूँढ़ते हुए जो समझ रखता हो, और कोई नहीं मिलता। जो उसकी प्रजा को निगल जाते हैं, वे वहाँ भय से जकड़ जाते हैं जहाँ डरने की कोई बात न थी। यह सिय्योन से उद्धार की लालसा के साथ समाप्त होता है।
53 1मूर्ख अपने मन में कहता है, “कोई परमेश्वर नहीं है।” वे भ्रष्ट हो गए हैं, और घृणित कुकर्म करते हैं; कोई भला करनेवाला नहीं है।
2हमारे परमपिता ने स्वर्ग से सारी मनुष्यजाति पर दृष्टि की, कि देखें कि कोई समझनेवाला, कोई उनका खोजी है या नहीं। 3वे सब के सब भटक गए हैं; वे मिलकर भ्रष्ट हो गए हैं; कोई भला करनेवाला नहीं है, एक भी नहीं।
4क्या अनर्थ करनेवालों को कुछ भी ज्ञान नहीं—वे जो मेरी प्रजा को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी खाते हैं, और हमारे परमपिता को नहीं पुकारते? 5वहाँ वे भय से थर्रा उठे, जहाँ भय का कोई कारण न था; क्योंकि हमारे परमपिता ने उसकी हड्डियाँ बिखेर दीं जिसने तेरे विरुद्ध छावनी डाली थी; तूने उन्हें लज्जित किया, क्योंकि हमारे परमपिता ने उन्हें तुच्छ जाना है।
6आह, कि इस्राएल का उद्धार सिय्योन से निकले! जब हमारे परमपिता अपनी प्रजा को बंधुआई से लौटा लाएँगे, तब याकूब मगन हो, इस्राएल आनन्दित हो।