पृथ्वी की छोर से एक पुकार
प्रधान बजानेवाले के लिये : तारवाले बाजों के साथ। दाऊद का भजन।
पृथ्वी की छोर से भेजी गई एक प्रार्थना, ऐसे व्यक्ति की जिसका मन मूर्छित हो रहा है; वह अपने पिता से माँगता है कि उसे उस चट्टान पर ले चले जो उससे ऊँची है। वह भेंट नहीं, निवास चाहता है — तेरे तम्बू में सदा — और राजा के लिए लम्बी आयु।
61 1हे मेरे परमपिता, मेरी दुहाई सुन; मेरी प्रार्थना पर ध्यान दे। 2जब मेरा मन मूर्च्छित होता है, तब मैं पृथ्वी की छोर से तुझे पुकारता हूँ; मुझे उस चट्टान तक ले चल जो मुझ से ऊँची है। 3क्योंकि तू मेरा शरणस्थान बना है, शत्रु के सामने एक दृढ़ गढ़।
4मेरी अभिलाषा है कि तेरे तम्बू में सदा वास करूँ, और तेरे पंखों की आड़ में शरण लूँ। 5क्योंकि हे मेरे परमपिता, तू ने मेरी मन्नतें सुन ली हैं; तू ने मुझे उनका भाग दिया है जो तेरे नाम का भय मानते हैं। 6राजा की आयु को बढ़ा; उसके वर्ष बहुत पीढ़ियों तक बने रहें। 7वह हमारे परमपिता के सम्मुख सदा राज्य-सिंहासन पर विराजमान रहे; अपनी वाचा की करुणा और सच्चाई को उसकी रक्षा के लिये नियुक्त कर। 8तब मैं सदा तेरे नाम का भजन गाता रहूँगा और दिन-प्रतिदिन अपनी मन्नतें पूरी करता रहूँगा।